कथादेश के फरवरी 2009 अंक में, 2005 के साहित्य के लिए नोबल पुरुस्कार से सम्मानित हैरोल्ड पिंटर के बारे में पढ़ते हुए मुझे लगा कि क्यों न इसे उन पाठकों से भी बांटा जाए जो शायद इसे पढ़ने से रह गए हों...
घर और घर
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वह मेरे भीतर-कहीं से निकलकर
मेरे सामने खड़ा हो गया
और बुदबुदाने लगा -
घर वह नहीं
जहाँ आदमी रहता है
घरों में आदमी अब कहाँ रहता है
जिसे तुम घर कहते हो
वह तो ए...
4 दिन पहले




1 टिप्प्णिय़ाँ:
हेराल्ड पिंटर का आलेख और कवितायेँ सायास युद्ध से आक्रांत मानवता के पक्ष में एक आवाज़ है.काजल कुमार को प्रकाशन के लिए ,यादवेन्द्र जी को सहज अनुवाद के लिए बधाई.09818032913
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